Saturday, April 30, 2011

ye zindgi bhi na...

















एक सच्चाई …
ऐ खुदा ये तेरी कैसी है माया...
------------------------------
किसी पे इतना है मेहरबान कि उसका हर दिन होली हर रात दीवाली है।
वहीं किसी से इतना है खफा कि उसका पेट हफ्तों से खाली है....
---दिलीप---

Thursday, April 28, 2011

ye zindgi bhi na....










इक अरसे से अंधेरे में था आज हंसी सुबह की शुरुआत हो गई।
आंखे तरस गई थी जिन्हें देखने को आज उनसे मुलाकात हो गई।
मिलती थी हर रोज मगर कभी बात करने की सूरत ना हुई।
ये खुदा का रहम ही है जो आज उनसे थोड़ी सी बात हो गई....
---
दिलीप---


Friday, April 22, 2011

ye zindgi bhi na....










कभी अंधेरों से ना डरता था मैं, अब उजालों से भी नजरे बचाता हूं मैं।

हमें पता है अब वो हमारे नहीं है, फिर ना जाने क्यों उन्हें अपना बताता हूं मैं।

---दिलीप---

ye zindgi bhi na.....


ना जाने क्यों तकदीर रुठी है हमसे, कि अब खुशियों का कोई ठिकाना नहीं है।
चाहता हूं मुस्कुराना औरों के जैसे, पर हसने के लिए कोई बहाना नहीं है....
---दिलीप--


ye zindgi bhi na.....


हर खुशी आएगी पहले ग़म उठाना सीख लो, अगर रौशनी पानी है तो घर जलाना सीख लो
लोग मुझसे पूछते हैं तुम शायरी कैसे करते हो, मैं ये कहता हूं किसी से दिल लगाना सीख लो....
--दिलीप-




कौन खुश है इस दुनिया में सबके अपने- अपने गम है।
फर्क बस इतना है किसी के ज्यादा तो किसी के कम है.....
--दिलीप--




हम उन्हें अपना मानते है ये हमारा करम है।
वो कहते है कम बोलो तुम्हे मेरी कसम है।
उन्हें लगता है हम मुस्कुराते है बहुत ज्यादा।
काश वो समझते इस मुस्कुराहट में छुपे कितने गम है....
--दिलीप--


जब हमने अपने दिल का हाल उन्हे सुना दिया।
बड़े प्यार से उन्होंने इस दिल को ठुकरा दिया।
जख्म देकर कहते है, आप चुप क्यों रहते हो।
उन्हें ये नहीं पता की हमें खामोश तुमने ही बना दिया...
--दिलीप--

ये जिन्दगी रोज गुजरती है कई सवालों की तरह।
हमने चाहा उन्हें बस चाहने वालो की तरह।
मेरे ख्वाब इतने कमजोर तो ना थे शायद।
की उन्होंने भुला दिया बेवजह ख्यालों की तरह...
--दिलाप--


यू तो गमों में भी हस लेता था मैं । आज क्यो बेवजह उदास होने लगा हूं मैं।
बरसों से हथेलिया खाली थी मेरी। फिर आज क्यों लगता है सब खोने लगा हूं मैं......
--दिलीप--


छोटी सी जिन्दगी हजार लोग, बिछड़ने के बाद कौन किसको पहचानता है।
अरमां बहुत जल्दी पुरे कर लो, जिन्दगी कब साथ छोड़ दे ये कौन जानता है....
-दिलीप-


ये जिन्दगी भी ना..मंजिल मिलने से पहले साथ छोड़ देती है।
सपने दिखाती हैं बहुत पर हकिकत होने पहले उन्हें तोड़ देती है।
जिनको पाने कि तम्मना हो दिल में, वो पुरी नहीं होती।
और जिसकी ख्वाहिश ना हो उनसे ही रिस्ता जोड़ देती है...
--दिलीप--



मैं जनता हूं ये ख्वाब झूठे है, ये खुशियां अधुरी है।
मगर जिन्दा रहने के लिए, कुछ गलतफहमियां भी जरुरी है...

--दिलीप---


कभी देखा ही नही उनको आँख भर के, रुबरु होते ही उनके पलके झूक जाते है।
कह दो उनसे गुजरे हमारी गलियों से आहिस्ता, कदमों की आहट से धड़कन तक रुक जाते है.....


हर तरह से उन्हें मनाया, पर वो इस दिल के पास नही आते।
वो कहते हैं कम बोला करो, ज्यादा बोलने वोले हमे रास नही आते....


ना जाने क्या ख़ता हुई हमसे, जो हर पल वो इस दिल को आजमाते हैं।
मिलते हैं हर रोज हमसे, कैसे कहें कि हम उन्हें कितना चाहते हैं...



जिन्दगी के रंग भी कितने अजीब होते है, जूदा वही होते है जो अक्सर दिल के करीब होते है।
चाहे जितना तौल ले खुदको वो हीरो से, पर रिस्तो के मामले में वही सबसे गरीब होते है........



कुछ ऐसी चली किस्मत की आधी, कि हर एक शक्स बेगाना हो गया...
शिकवा किससे करे अपनी तन्हाई का, जब खुद का ही साया अंजना हो गया.....



हम तो खोए रहते है बस तेरी यादो में, ना जाने तुझे इसकी ख़बर क्यो ना लगी..
मेरा सारा घर जल गया मेरे सोने से, पर मेरी ये आखें तेरे सपनों से ना जगी...........


दिल तोड़ने वालो को दिल टूटने के दर्द का अंदाजा क्या होगा।
उनके लिए आसूओं की अहमियत,पानी की बूंदों से ज्यादा क्या होगा।


सपनो की दूनिया कितनी अजीब होती है। झूठी ही सही पर खुशी नसीब होती है।
बेशक आते हैं सपने बस कुछ पल के लिये। पर इन पलो में ज़िन्दगी ज़न्नत के क़रीब होती है..............

हम तो मौजूद थे अँधेरों में उजालों कि तरह ...
तुमने चाहा हि नहीं चाहने वालों कि तरह....


आज ज़िन्दगी ने फिर अपना रंग दिखा दिया..अपने रंगो को भरने के लिये हमारे अरमानों को जला दिया......






ye zindgi bhi na.....

ना जाने क्यों तकदीर रुठी है हमसे, कि अब खुशियों का कोई ठिकाना नहीं है।
चाहता हूं मुस्कुराना औरों के जैसे, पर हसने के लिए कोई बहाना नहीं है....
---दिलीप---

Sunday, August 29, 2010

सचिन का तराशा हीरा क्यों है धोनी के लिए बेकार

एक बार फिर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के तरासे हीरे सौरभ तिवारी कि चमक नजर नही आई। श्रीलंका में ट्राइसीरीज के फाइनल मुकाबले में भी कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सौरभ तिवारी पर भरोसा करने के बजाए रोहित शर्मा पर भरोसा किया और नतीजा ये ह्आ की भारत को हार का सामना करना पड़ा।

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के तीसरे संस्करण में मुंबई इंडियन्स के शुरुआती दो मुकाबलों में लगातार धुआंधार अर्धशतक बनाए। उसके बाद सचिन से प्रशंसा और खास तोहफा पाने वाले झारखंड के सौरभ तिवारी ने पहली बार टीम इंडिया में अपनी जगह बनायी। लेकिन उन्हे एशिया कप में एक बार भी अंतिम 11 में खेलने का मौका नहीं दिया गया है। आखिर महेंद्र सिंह धोनी सौरभ तिवारी के साथ ऐसी नाइंसाफी क्यों कर रहे हैं, धोनी को भारत की जीत से ज्यादा इस बात का डर है कि आने वाले समय मे सौरभ तिवारी उनसे आगे ना निकल जाए।

गौरतलब है कि आईपीएल-3 से पहले सौरभ तिवारी के प्रदर्शन से प्रभावित होकर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया था सौरभ तिवारी ने अपने उस्ताद सचिन तेंदुलकर के विश्वास को कायम रखा।

एक नजर इस आकड़े पर-
1. तिवारी ने अब तक 31 ट्वेंटी-20 मैचों में 31.16 औसत से कुल 748 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 133.09 है।
2. आईपीएल-3 में उपविजेता मुंबई की ओर से 419 रन बनाने के साथ आठवें सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज का मुकाम हासिल किया।
3. सौरभ तिवारी झारखण्ड रणजी टीम के कप्तान भी हैं।
4. उन्होंने ने झारखण्ड के लिए 19 प्रथम श्रेणी मैचों में 50.93 के प्रभावशाली औसत के साथ 1579 रन बटोरे।
5. वहीं पिछले रणजी प्लेट डिवीजन में सौरभ तिवारी ने पांच मैचों में तीन शतक लगाए और 98.83 के औसत से 593 रन बनाये।